घटक: गौमूत्र, सौंफ, जीरा
सेवन विधि: सुबह-शाम भोजन के एक घण्टे पूर्व या बाद में लें।
सामान्य मात्रा: व्यस्कों के लिए 40-60 मि.ली./दिन
किशोरों के लिए 20-30 मि.ली./दिन
नोट : वैद्य की सलाह से लें।
महर्षि सुश्रुत गौमूत्र के बारे में कहते हैं।
गौमूत्रं कटु तीक्ष्णोषणं सक्षारत्वान्नन वातलं ।।
लध्वाग्निदीपनं मेद्यन पित्तलं काफवातजित ।।
शोधनं कफवातघ्नं क्रिमिनेदोविषापहं ।। अर्थोजठरगुल्मानं शोफ रोचकनाशनं ।।
पांडुरोगहरं भेदि हृदयम दीपनपाचनं ।।
सुश्रुत सूत्रस्थान मूत्रवर्ग ।5।
महर्षि सुश्रुत अनुसार गौमूत्र ना सिर्फ शरीर को विषमुक्त करता है अपितु अनेकों रोगों को हरने बाला चमत्कारिक द्रव्य है।
गव्यसिद्धों के निरीक्षण में तैयार किया गया


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