ब्रह्म रसायन

घटक द्रव्य: आंवला, हरीतकी, ब्राह्मी, पीपल, शंखपुष्पी, शालपर्णी, पुनर्नवा, पृष्टपर्णी, गोखरू, छोटी कटेली, बड़ी कटेली, बेल छाल, अरणी, गंभारी, सोनपाठ छाल, पाटला छाल, माषपर्णी, मुद्रपर्णी, खेरंटी, एरंडमूल, जीवक, ऋषभक, मेधा, जीवंती, शतावर, नरकुल, कुश, कास, गन्ने की जड़, धान की जड़, नागरमोथा, सफेद चंदन, वायविंडन, अगर, मुलेठी, हल्दी, वचा, नागकेसर, छोटी इलाइची, दालचीनी, तिल का तेल, बिलोना गौ घृत, शुद्ध शहद, शुद्ध जैविक खांड।

लाभ: मतिष्क के लिए आयुर्वेद का वरदान, शुद्ध गाय के बिलोना घृत, जैविक खांड, शुद्ध देसी शहद, कच्ची हरड़, आंवला एवम 42 दुर्लभ एवम अत्यंत लाभकारी औषधियों से बना ब्रह्म रसायन के सेवन से समस्त रोग निवृत होकर दीर्घायु की प्राप्ति होती है। देह शुद्धि होती है, शरीर बल, स्फूर्ति, कान्ति, वीर्य, धारणा शक्ति और ओज की वृद्धि होती है। मस्तिष्क के रोगियों के लिए यह ब्रह्म रसायन अत्यंत लाभकारी है। मेधा शक्ति को बढ़ाने वाला यह ब्रह्म रसायन आपके विद्या ग्रहण करने वाले बच्चों के लिए अत्यंत उपयोगी है। यह अद्भुत ब्रह्म रसायन हृदय, मस्तिष्क, फेफड़ों, आमाशय, यकृत, प्लीहा, वृक्क आदि सब इंद्रियों (अवयवों) को सबल बनाकर देह को शुद्ध बनाता है। अति स्त्री समागम और अधिक चिन्ता से जिनके वीर्य और देह निर्बल हो गये हो, उनके लिये यह अति हितावह है।

मात्रा: आधे से 4 तोले तक प्रातःकाल सेवन करें। पाचन के पश्चात ही दूध, घी और भोजन का सेवन कर सकते हैं। प्रारम्भ में आधा तोला मात्रा लें। फिर धीरे-धीर 4 तोले तक अग्नि बल के अनुसार बढ़ावे। (1 तोला = 11.66 ग्राम)

घटक द्रव्य: आंवला, हरीतकी, ब्राह्मी, पीपल, शंखपुष्पी, शालपर्णी, पुनर्नवा, पृष्टपर्णी, गोखरू, छोटी कटेली, बड़ी कटेली, बेल छाल, अरणी, गंभारी, सोनपाठ छाल, पाटला छाल, माषपर्णी, मुद्रपर्णी, खेरंटी, एरंडमूल, जीवक, ऋषभक, मेधा, जीवंती, शतावर, नरकुल, कुश, कास, गन्ने की जड़, धान की जड़, नागरमोथा, सफेद चंदन, वायविंडन, अगर, मुलेठी, हल्दी, वचा, नागकेसर, छोटी इलाइची, दालचीनी, तिल का तेल, बिलोना गौ घृत, शुद्ध शहद, शुद्ध जैविक खांड।

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