घटक- तिल तेल, बेल छाल, बड़ी कटेरी, गोखरु, खरेंटी पंचांग, सोनाषाठा, पुनर्नवामूल, अरणीमूल, गंधप्रसारणी, पाटला, दूध, शतावर, असगंध, देवदारु, शालपर्णी, नागकेसर और 31 अन्य जड़ीबूटियां
लाभ – समस्त प्रकार के वात रोगों, कम्पन, पंगु, बाधिर्य, शुक्रक्षय आदि रोगों में लाभकारी
नोट : वैद्य की सलाह से लें।
गव्यसिद्धों के निरीक्षण में तैयार किया गया


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