घटक: एरंड की जड़, तगर, सौंफ, जीवन्ती, रास्ना, सेंधा नमक, दालचीनी, वायविडंग, मुलेठी, सोंठ, बकरी का दूध, काले तिल का तेल, भांगरे का रसगुण।
उपयोग- पुराना जुकाम, बार-बार सर्दी-जुकाम होना, नाक के मस्से, पुराने सिर-दर्द, सूर्यावर्त (आधाशीशी), बालों का गिरना बादि सब विकारों में यह तेल बहुत गुधकारी और लाभदायक है।
नोट: वैद्य की सलाह से लें।
मन्दसियों के निरीक्षण में तैयार किया गया


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